दस महाविद्या में दूसरी विद्या माँ तारा माँ नील तारा उग्र तारा का सरल मन्त्र साधना देता है वाक्य सिद्धि

 दस महाविद्या में दूसरी विद्या माँ तारा
माँ नील तारा उग्र तारा का सरल मन्त्र साधना देता है वाक्य सिद्धि
(Neel Tara Maa Tara ke siddh mantra pryog)

 

जब महादेव शिव ने आदि शक्ति माता सती को उनके पिता दक्ष प्रजापति के यज्ञ में बिना बुलाये जाने से इनकार किया तो माँ आदि शक्ति क्रोधित हो गयी और माता ने कहाँ की आप आज्ञा दे ना दे मुझे तो बस जाना है शिवजी ने पुनः आग्रह किया की ऐसे बिन बुलाये नहीं जाना चाहिए तो माता अत्यधिक क्रोधित हो गयी और माँ आदि शक्ति ने अपने दस महा शक्तिशाली रूपों के दर्शन कराये जो दशो दिशाओं में खड़ी थी महादेव भी माता के इन रूपों का रहस्य समझ नहीं सके तब महादेव ने देवी से कहा की हे देवी ये देविया कौन है तब माता ने अपने दस महाविद्या रूपों से महादेव को परिचय कराया दस महाविद्या में पहला रूप काली है । 



जब काली ने नीला रूप धारण किया तो वो तारा कहलाई तारा यानी तारने वाली यह देवी तारक है मोक्ष को प्रदान करने वाली है इसीलिए ये तारा कहलाई माँ तारा की साधना उपसना से वाक्य सिद्धि की प्राप्ति होती है इस देवी का वर्ण नीला है इसलिए इसे नील सरस्वती भी कहा जाता है कहते है भयंकर राक्षस हीय्ग्रीव का वध करने के लिए माता ने नीला वर्ण धारण किया था यह माता का अति भयंकर रूप है उग्र रूप है इसलिए इन्हें उग्रा भी कहा जाता है या फिर इन्हें उग्र तारा रूप में भी पूजा जाता है । देवी तारा अपने साधक और उपासक को भयानक से भी भयानक संकटो से रक्षा करती है इसलिए उन्हें उग्र तारिणी भी कहा जाता है माँ आदि शक्ति का यह रूप दस महाविधाया में दूसरा रूप है माता इस रूप में अपने साधक से बहुत ही शीघ्र प्रसन्न हो जाती है कभी कभी तो साधना के पहले दिन एक रात में ही साधक को दर्शन दे देती है भारत में माँ तारा का सबसे भव्य रूप श्री विग्रह कांगड़ा में है जहाँ माता वज्रेश्वरी देवी के नाम से प्रसिद्ध है ।



आज इस लेख में आपको माँ तारा के सबसे सरल तीन मन्त्र देने जा रहा हूँ  


माँ तारा के तीन मन्त्र है जिन्हें आप रोजाना एक निश्चित समय में तीन तीन माला जाप करने से माता शीघ्र प्रसन्न होती है ऐसे साधक के मुख से निकला हर वचन सिद्ध हो जाता है ।


माँ तारा के सिद्ध मन्त्र

यहाँ आपको दिए जा रहे है इन्हें आप किसी भोज पत्र पर लिख कर रखे


माँ तारा के चमत्कारी मंत्र

पहला मन्त्र :- ह्रीं स्त्रीं हूँ फट ।

दूसरा मन्त्र :- श्रीं ह्रीं स्त्रीं हूँ फट ।

तीसरा मंत्र : - ॐ श्रीं ह्रीं स्त्रीं हूँ फट ।


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माँ तारा के यह तीनो मंत्र बेहद चमत्कारी है इन तीनो मंत्रो को आप किसी भोज पत्र पर लिख कर रखे और रोजाना नियम से एक समय तय करके इनका नियमित जाप करे इसके जाप से हर संकट हर विपति दूर हो जाती है नियमित जाप से बड़े बड़े असाध्य रोग भी ठीक होने लगते है ऐसे साधक को शत्रु का भय नहीं सताता है और साधक और साधक का परिवार सदा निश्चित रहता है ।

Narendra Agarwal 

माँ तारा की सरल मंत्र साधना कैसे करे  विडियो देखे

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