खाटू श्यामजी खाटू में शीश अवतरण की कहानी || खाटू श्याम बाबा का शीश खाटू में कैसे प्रकट हुआ

खाटू श्यामजी खाटू में शीश अवतरण की कहानी

Khatu Naresh  Hare ka sahara Lakhdatar teen ban dhari miracle Story  Shish Appeared in Khatu  

श्याम बाबा का शीश खाटू में कैसे प्रकट हुआ

 

कलयुग में अपने भक्तो की हर मनोकामना पूरी करने वाले देव कलयुग के अवतारी सभी भक्तो के प्रिय खाटू श्याम बाबा कलयुग के अवतारी और हारे के सहारे कहलाते है, महाभारत काल में श्याम बाबा बर्बरीक के रूप में थे बर्बरीक  महाबली भीम के पुत्र घटोत्कच के पुत्र थे बर्बरीक की माता का मौरवी है । बर्बरीक को शिव के वरदान से तीन अमोक बाण मिले थे और उन्होंने अपनी माता को वचन दिया था की वो हारने वाले का साथ देंगे श्री कृष्ण को यह डर था की जब कौरव हारने लगेंगे तो बर्बरीक निश्चित रूप से उन्ही का साथ देंगे और बर्बरीक के तीन बाणों का सामना करना किसी के भी बस का नहीं था तब भगवान श्री कृष्ण ने बर्बरीक से उसका शीश दान में मांग लिया और उसी समय हमारे प्यारे खाटू श्याम बाबा ने जो उस समय बर्बरीक के रूप में थे श्री कृष्ण द्वारा उनके शीश के दान का कहने से पल भर में अपना शीश हँसते- हँसते अपने ही हाथो से काटकर श्री कृष्ण को सौप दिया ।

 

बर्बबरीक द्वारा  शीश का दान करने पर कहलाये शीश के दानी  

बर्बरीक के इस प्रकार शीश के दान करने पर श्री कृष्ण बहुत प्रसन्न हुए और बर्बरीक को वरदान दिया की पूरी दुनिया उन्हें कलयुग में बर्बरीक को उनके श्याम नाम से जानेगी और घर घर में उनकी श्याम नाम से पूजा होगी अपने भक्तो के कष्ट हरण के लिए भगवान श्री कृष्ण ने बर्बरीक के शीश को अजर अमर हो जाने का भी वरदान देते हुए अपनी सारी शक्तियाँ बर्बरीक के शीश को दे दी ।

भगवान श्री कृष्ण ने बर्बरीक के शीश को कलयुग में अवतरित होने का वरदान दिया और कहाँ जैसे-जैसे कलियुग बढ़ता जाएगा  तुम श्याम के नाम से पूजे जाओगे जो भी भक्त सच्चे दिल केवल तुम्हारे नाम का उच्चारण करेग तुम्हारी सच्चे मन और प्रेम-भाव से पूजा करेंगे तो उनकी सभी मनोकामना पूर्ण होगी और तुम लखदातर कहलाओगे ।

 

shyam baba ke shish avtran ki katha

भीम के पौत्र बर्बरीक द्वारा अपने शीश का दान फाल्गुन शुक्ल पक्ष की बाहरस के दिन किया गया था इसलिए फाल्गुन मास की बाहरस सबसे खास मानी जाती है राजस्थान के सीकर जिले में एक छोटी सी नगरी है खाटू नगरी और इसी खाटू नगरी में शीश के दानी का सबसे प्रसिद्ध और सबसे चमत्कारी मंदिर है जहाँ बाबा श्याम के दर्शन करने मात्र से बाबा से नजर मिलते ही भक्तो की सभी मनोकामना पूर्ण होने लगती है ।

 

तो खाटू में यह मंदिर कैसे बना कैसे बाबा श्याम का शीश अवतरित हुआ या प्रकट हुआ इसकी एक पौराणिक कहानी है

श्याम कुंड में डुबकी से होते सारे पाप नष्ट 

खाटू नगरी में एक बहुत ही पवित्र कुंड है जिसे श्याम कुंड कहते है श्याम कुंड के बारे में कहते है की इसी कुंड में श्याम बाबा का शीश अवतरित हुआ था यही पर श्याम कुंड में ही बाबा श्याम का शीश जो महभारत काल में श्री कृष्ण ने बर्बरीक से दान में ले लिया था भगवान श्री कृष्ण के वरदान के कारण बर्बरीक का वही शीश राजस्थान के खाटू नगरी  की पवित्र धरती पर प्रकट हुआ, खाटू में जहाँ यह शीश प्रकट हुआ उसी स्थान को श्याम कुंड के नाम से जाना जाता है । कहते है की श्याम कुंड में डुबकी लगाने से व्यक्ति के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और श्याम बाबा का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

 

खाटू नगरी में शीश प्रकट करने की लीला की कहानी 

एक प्राचीन कहानी के अनुसार खाटू नगरी में राजा खटवान का राज हुआ करता था उस समय श्याम कुंड के स्थान पर के यहाँ एक बड़ा सा रेत का टीला था उस टीले के आस पास कुछ गायें चरने के लिए आया करती थी, उसी टीले के ऊपर एक आंक यानी आंकड़े का पौधा भी था तो गाये वहां चरने आती शाम को उनका मालिक उन्हें वापिस घर ले जाता उनमें से एक गाय टीले के पास आकर एक स्थान पर शांत भाव से खड़ी हो जाती और फिर उसके थनों से स्वतः ही दूध निकलने लगता जब वो गाय शाम को अपने मालिक के घर जाती और उसका मालिक जब उसका दूध निकलता तो दूध ही नहीं आता ऐसा कई दिनों तक हुआ तो एक दिन उस गाय के मालिक ने देखा की इस गाय का दूध कहाँ जा है इसका पता करना पड़ेगा की आखिर यह गाय दूध क्यों नहीं दे रही ऐसा तो नहीं है की कोई रास्ते में ही इसका दूध चोरी कर रहा है तो अगले ही दिन उस गाय के मालिक ने उस गाय का पीछा करना शुरू कर दिया तो क्या देखा की वो गाय उस टीले पर शांत भाव से खड़ी है और उसका दूध अपने ही निकल रहा है पास आकर देखा तो दूध जमीन के अंदर जा रहा था मानो कोई इस गाय का दूध पीये जा रहा हो ।

 

अब वो गाय का मालिक रोज इस प्रक्रिया को देखता । उसे इस बात का आश्चर्य हुआ की गाय उस स्थान पर जाते ही कैसे दूध देने लगती हैं  अब उसे समझ नहीं आ रहा था की वो करे भी तो क्या करे उसे लगा की कोई भुत प्रेत का चक्कर है या फिर कुछ और ही तो घबराया हुआ गाय का मालिक खाटू नगरी के राजा के पास गया जब उसने वहां के राजा को यह बात बताई तो राजा ने सोचा यह कोई पागल है राजा और उसकी सभा में किसी को भी इस बात पर जरा भी विश्वास नहीं हुआ सभी ने सोचा यह व्यक्ति पागल है बहकी बहकी बाते कर रहा है भला ऐसा भी कही होता है लेकिन जब उसने कई बार बार-बार राजा से कहा की राजाजी आप स्वयम एक बार खुद चलकर देख लीजिये तब राजा को भी जिज्ञासा हुयी राजा भी यह जानना चाहता था की आखिर उसकी बात में कितनी सच्चाई है तो राजा ने अपने साथ अपने कुछ लोगो को कुछ मंत्रियो को साथ लिया और चल पड़े जब राजा ने देखा की गाय उस टीले पर खड़ी होकर अपने आप ही किसी को दूध पिला रही है तो राजा और राजा के साथ आये लोगो का भी सर चकराया, वो बोले ये क्या है? यह गाय का मालिक तो सही बोल रहा है यह पागल नहीं है यह तो सच है गाय अपने आप ही दूध दे रही है तब राजा ने कहा इस टीले के नीचे क्या है पता करो इसकी खुदाई करो ।

तब कुछ मजदूरो ने उस जगह पर राजा के सामने ही खोदना शुरू किया लेकिन जैसे ही जमीन पर पहली कुदाली पड़ी वैसे ही वहा जमीन के भीतर से आवाज आई,  अरे धीरे धीरे खोदो यहाँ मेरा शीश है जमीन के भीतर से आवाज सुनकर सारे मजदूर डर कर भाग खड़े हुए अब राजा भी परेशान होकर अपने महल में चला गया ।

उसी रात्रि राजा को स्वपन आया सपने में खाटूश्याम बाबा ने राजा को साक्षात दर्शन देकर कहा की हे राजन अब समय आ गया है मेरे शीश के अवतरित होने का मैं महाभारत काल में वीर बर्बरीक था और मेरे द्वारा भगवान श्री कृष्णा को अपना शीश दान में दिया दिया तभी उनसे मुझे कलियुग में पूजित होने का वरदान मिला था इस टीले के नीचे मेरा शीश है तुम स्वयं यहाँ धीर-धीरे खुदाई करो और यहाँ से मेरा शीश निकालो और इस शीश को अपनी इस पवित्र नगरी खाटू में मेरा मंदिर बना स्थापित करो ।

 

सुबह जब राजा उठा तो तो स्वपन की बात को ध्यान रखकर राजा स्वयं उस टीले पर जाकर धीरे धीरे खुदाई करना शुरू किया जब उस स्थान की मिटटी को हटाया गया तो वहां पर श्री श्याम बाबा का शीश निकला जहाँ वो शीश निकला वहां एक कुंड बनाया गया जिसे आज श्याम कुंड के नाम से पुकारा जाता है।

और इस प्रकार से कलियुग देव श्री श्याम का शीश खाटू नगरी में अवतरित हुआ खाटू के राजा ने खाटू में बाबा श्याम का मंदिर बना कर उसमे वो शीश स्थापित किया जो आज बढ़ते कलयुग में हारे का सहारा बन रहा है यदि आपको बाबा के दर्शन का सौभाग्य मिले तो फाल्गुन शुक्ल पक्ष में खाटू में एक शानदार मेला भरता है आप उस मेले में जरुर से भाग ले ।

Narendra Agarwal 

खाटू श्याम बाबा का शीश खाटू में कैसे प्रकट हुआ विडियो देखे 




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1 Comments

  1. Jai shri shyam mene bhi baba shyam ke darshan paa piyee jaii shri shyam

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